भारत में चीनी के दाम क्यों बढ़े? क्या इथेनॉल उत्पादन है बड़ी वजह

नई  दिल्ली
 भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा चीनी एक्सपोर्ट करने वाला देश है। लेकिन मौजूदा समय में देश की स्थिति चीनी को लेकर अच्छी नहीं है। खुदरा बाजार में लगातार कीमतें बढ़ रही है। देश के कुछ हिस्सों में एक किलोग्राम चीनी का रेट 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। अब सवाल खड़ा हो रहा है कि दुनिया को चीनी बेचने वाले देश में आखिर किस वजह से कमी देखने को मिल रही है। क्या इथेनॉल इसके पीछे की वजह है?

कितना प्रोडक्शन हुआ
वित्त वर्ष 2021-22 में देश के अंदर कुल 358 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ था। इस साल तक ओपनिंग स्टॉक 63 से 65 लाख टन था। 2022-23 में प्रोडक्शन घटा और यह 328 मिलियन टन हुआ। 2023-24 में चीनी का कुल प्रोडक्शन 320 मिलियन टन हुआ। बता दें, 2025-26 के दौरान कुल 324 मिलियन टन शुगर प्रोडक्शन का अनुमान जताया गया। इसमें इथेनॉल के लिए होना वाला आंकड़ा भी शामिल है।

फरवरी में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 290 लाख टन का शुगर उत्पादन हुआ। इसमें 31 लाख टन इथेनॉल के प्रोडक्शन में प्रयोग हुआ शुगर शामिल नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सरकार इस साल नए सीजन से पहले तक 280 लाख टन की खपत का अनुमान लगाया था।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की कई वजहें हैं। पहली वजह प्रोडक्शन में कमी होना। इसके भी कई कारण हैं। जिसमें एथेनॉल भी शामिल है। भारत आक्रमत तरीके से एथेनॉल का प्रोडक्शन कर रहा है। सरकार ने इसके लिए पिछले कुछ सालों में कई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सेटअप की है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि कुल एथेनॉल प्रोडक्शन में शुगर का योगदान महज 30 से 35 प्रतिशत ही है।

दूसरी वजह प्रोडक्शन में गिरावट है। सरकार को सीजन के शुरुआत में जितने उत्पादन की उम्मीद थी। उतना प्रोडक्शन हुआ नहीं। इसी दौरान भारत ने यूएई सहित अन्य देशों को चीनी बेच दिया था। इस साल मई में सरकार ने एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध तो लगाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बता दें, प्रोडक्शन में गिरावट की वजह उत्तर प्रदेश में फसलों में कीड़े लग गए। जिस गन्ने के फसल पर बुरा असर डाला।

किस बात की चिंता सता रही है?
आने वाले महीनों कई प्रमुख त्योहार हैं। जिसमें रक्षा बंधन, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दीवाली आदि शामिल है। इस दौरान देश के अंदर चीनी की डिमांड बढ़ जाती है। यही कारण है कि सरकार ने आन-फानन में शुगर इम्पोर्ट को मंजूरी दे दी है। चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और उपलब्धता बढ़ाने के लिए 31 अक्टूबर तक शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है।

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