वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बढ़ा बाघों का कुनबा, बाघिन N-6 ने दिए 4 शावकों को जन्म

दमोह
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। कभी कुएं में गिरने के कारण मौत के मुंह तक पहुंच चुकी बाघिन एन-6 ने अब इस जंगल को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है। इतना ही नहीं इस बाघिन ने चार शावकों को जन्म देकर यहां अपने परिवार की नई पीढ़ी को भी आगे बढ़ाया है। अप्रैल 2026 में जन्मे चारों शावक अब करीब छह माह के हो चुके हैं।

हाल ही में यह अपनी मां के साथ टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में कैद हुए हैं। कैमरों में बाघिन कभी अपने शावकों के साथ जंगल में विचरण करती नजर आ रही है तो कभी उनके साथ बैठी दिखाई दे रही है। बाघिन और चार शावकों की तस्वीरें टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में बढ़ते कुनबे की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश कर रही है।

राधा के बाद एन-6 ने बढ़ाया कुनबा
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघों को
बसाने की शुरुआत बाघिन राधा को लाकर की गई थी, शुरुआती दौर में राधा के कारण ही इस क्षेत्र में बाघों की मौजूदगी को लेकर विशेष चर्चा रही। अब यहां दूसरी बाघिन एन-6 ने भी चार शावकों को जन्म देकर अपने परिवार को आगे बढ़ाया है। इससे टाइगर रिजर्व में बाघों की नई पीढ़ी के विकसित होने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

एन-6 के चार शावकों के साथ कैमरा ट्रैप में कैद होने से यह भी सामने आया है कि बाघिन इस क्षेत्र में अपने शावकों के साथ विचरण कर रही है। एक बाघिन का चार शावकों के साथ दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे टाइगर रिजर्व में बाघों के प्राकृतिक प्रजनन और उनके अनुकूल रहवास की तस्वीर भी सामने आती है।

फरवरी 2025 में हुआ था खतरनाक हादसा
यह पूरी कहानी फरवरी 2025 की है। सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आने वाले हरदोई गांव में यह घटना घटी थी। करीब तीन साल की एक बाघिन एक जंगली सुअर का पीछा करते हुए अचानक एक गहरे और खुले कुएं में जा गिरी थी। इस अप्रत्याशित हादसे के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने करीब चार घंटे तक चले एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया था।

खटिया और हाइड्रोलिक क्रेन से चला था रेस्क्यू
कुएं में गिरी बाघिन और सुअर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस अनोखे और जोखिम भरे रेस्क्यू में हाइड्रोलिक क्रेन के साथ-साथ एक पारंपरिक बुनी हुई खटिया का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना ने एक बार फिर यह देश के सामने ला दिया था कि जंगलों के किनारे बसे गांवों में खुले कुएं वन्यजीवों के लिए कितने जानलेवा साबित हो सकते हैं।

रेस्क्यू के बाद नौरादेही लैंडस्केप में छोड़ा गया था
कुएं से सुरक्षित बाहर निकाले जाने के बाद वन विभाग ने बाघिन की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए उसके गले में रेडियो कॉलर लगाया था। इसके बाद उसे नौरादेही लैंडस्केप के अंतर्गत आने वाले वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के जंगलों में शिफ्ट कर दिया गया। इस रीलोकेशन का मुख्य उद्देश्य यही था कि वह रेस्क्यू वाली पुरानी और तनावपूर्ण परिस्थितियों से दूर एक नए और सुरक्षित प्राकृतिक माहौल में खुद को ढाल सके।

कैमरा ट्रैप में कैद हुई मां और शावकों की जोड़ी
नये आशियाने में आकर इस बाघिन ने न सिर्फ खुद को उस नए माहौल के अनुकूल ढाला, बल्कि अप्रैल 2026 में चार शावकों को भी जन्म दिया। हाल ही में सामने आई कैमरा-ट्रैप की तस्वीरों में चारों शावक अपनी मां के साथ सुरक्षित रूप से चलते हुए नजर आ रहे हैं। वन अधिकारियों के अनुसार, इन शावकों का जंगल में अपने जीवन के शुरुआती छह महीने सफलतापूर्वक पार कर लेना एक बहुत बड़ी कामयाबी है।

शावकों के शुरुआती महीने होते हैं बेहद संवेदनशील

    वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, टाइगर के शावकों की जिंदगी के शुरुआती कुछ महीने बेहद नाजुक और खतरे से भरे होते हैं।

    इस दौरान शावक अपनी सुरक्षा, भोजन और शिकार करने के गुर सीखने के लिए पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर रहते हैं।

    सुरक्षित माहौल और मां की मौजूदगी के चलते ही यह नया कुनबा आज मध्यप्रदेश के जंगलों में फल-फूल रहा है।

 

 

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