यूपी के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर, 3.18 लाख महिलाओं को मिली मदद

महिला सुरक्षा से पुनर्वास तक एक छत के नीचे मिल रहीं सुविधाएं, संकटग्रस्त महिलाओं को संबल देने पर योगी सरकार का जोर

अस्थायी आश्रय, चिकित्सा, परामर्श और कानूनी सहायता से महिलाओं को सुरक्षित जीवन की राह दिखा रहे केंद्र

लखनऊ
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं और बालिकाओं को एक ही छत के नीचे सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। योगी सरकार प्रदेश के सभी 75 जिलों में ऐसे 124 केंद्र संचालित कर रही है। इनके माध्यम से अब तक करीब 3.18 लाख मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को मदद दी जा चुकी है। इन केंद्रों की व्यवस्था का उद्देश्य हिंसा, उत्पीड़न और पारिवारिक प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों में फंसी महिलाओं को तत्काल राहत देने के साथ उन्हें सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ने में सहयोग करना है।

संकट के समय सुरक्षा, चिकित्सा से लेकर कानूनी मदद तक
महिला कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को जरूरत के अनुसार अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, कानूनी मदद और पुलिस सहायता उपलब्ध कराते हैं। इसका उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को अलग-अलग सेवाओं के लिए कई स्थानों पर भटकने से बचाना और एक ही जगह पर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराना है। संकट की स्थिति में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने के साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी किया जाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों तक इन केंद्रों का संचालन महिला सुरक्षा से जुड़ी सहायता व्यवस्था को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हिंसा या उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं के लिए समय पर मदद, उचित परामर्श और कानूनी सहायता उनके अधिकारों की रक्षा तथा सुरक्षित भविष्य की राह तैयार करने में सहायक बन सकती है।

महिला कल्याण विभाग की निगरानी में सहायता और पुनर्वास पर जोर
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति ने बताया कि केंद्र सरकार से वित्त पोषित वन स्टॉप सेंटर योजना के तहत प्रदेश में 124 केंद्रों के माध्यम से अब तक करीब 3,18,500 मामलों में सहायता उपलब्ध कराई गई है। इन केंद्रों पर महिलाओं और बालिकाओं की जरूरत के अनुसार सुरक्षा, परामर्श, उपचार और कानूनी सहायता की व्यवस्था की जाती है। योजना का फोकस केवल संकट के समय राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित महिलाओं को परिस्थितियों से उबरने और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग देना भी है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में केंद्रों की मौजूदगी से महिलाओं के लिए सहायता तंत्र तक पहुंच बनाने का माध्यम उपलब्ध है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button