जगदलपुर में रेलवे की जमीन पर 530 से ज्यादा अवैध कब्जे, 44 साल पुराना आदेश बेअसर

जगदलपुर.

रेलवे स्टेशन के विस्तार और विकास की तैयारी के बीच रेलवे की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण ने नई चुनौती खड़ी कर दी है. हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर 44 साल पहले ही विस्थापन का आदेश जारी किया जा चुका था. जानकारी के मुताबिक वर्ष 1982 में वन मंत्रालय भोपाल ने रेलवे और वन भूमि पर बसे 45 परिवारों को विस्थापित करने के निर्देश दिए थे.

तत्कालीन राजस्व कार्यालय को इन परिवारों को दूसरी जगह बसाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उस समय कार्रवाई नहीं हुई. धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया और रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार अब इस इलाके में 530 से अधिक लोग काबिज हैं. स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का खामियाजा अब रेलवे और प्रशासन दोनों को उठाना पड़ रहा है. जगदलपुर स्टेशन को जंक्शन के रूप में विकसित करने के साथ यहां वाशिंग सेंटर और अन्य सुविधाओं के निर्माण की योजना है. इन परियोजनाओं के लिए रेलवे को अपनी जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराना जरूरी होगा. बताया जा रहा है कि पहले विशाखापट्टनम जोन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया रुक गई.

इधर, जहाजभाटा क्षेत्र के कब्जाधारियों को करकापाल और डोंगरीपारा कंगोली में विस्थापित किए जाने का उदाहरण भी मौजूद है. अब सवाल यह है कि 44 साल पुराने आदेश पर समय रहते अमल क्यों नहीं हुआ और मौजूदा कब्जाधारियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी कौन लेगा?.रेलवे के विकास की जरूरत और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के बीच प्रशासन को अब ठोस समाधान निकालना होगा.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button