रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार का ऐतिहासिक धमाका, 400 रन बनाकर पृथ्वी शॉ का रिकॉर्ड तोड़ा

नई दिल्ली
मुंबई के पूर्व बल्लेबाज सुतार ने नगालैंड के खिलाफ प्लेट डिवीजन के मुकाबले में 400 रन ठोककर इतिहास रच दिया. 29 साल के सुतार फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रनों की पारी खेलने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए रणजी ट्रॉफी के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेली.
500 से ज्यादा गेंदों तक क्रीज पर जमे रहे
सुतार की इस ऐतिहासिक पारी की सबसे खास बात उनका धैर्य और क्रीज पर टिके रहने की क्षमता रही. मौजूदा दौर में लंबे समय तक बल्लेबाजी करना एक चुनौती बनता जा रहा है, लेकिन सुतार ने अपनी पारी के दौरान गेंदबाजों को थकाकर रख दिया. उन्होंने 400 रनों का आंकड़ा पार करने के लिए 155वें ओवर तक बल्लेबाजी की.
आज के दौर में 500 से ज्यादा (517 गेंदें, 46 चौके, 7 छक्के) गेंदों तक क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. यह धैर्य, एकाग्रता और तकनीक का ऐसा इम्तिहान है, जिसमें बल्लेबाज की असली काबिलियत सामने आती है.
नगालैंड क्रिकेट स्टेडियम, सोविमा में खेले जा रहे मैच के दौरान सुतार ने टी-ब्रेक तक 392 रन बना लिए थे और नाबाद थे. इसके बाद उन्होंने 155वें ओवर में चौहरा शतक पूरा किया. उनकी इस पारी के दम पर मिजोरम ने 9 विकेट पर 581 रन बनाकर पारी घोषित कर दी.
443 रनों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से 44 रन दूर
सुतार के पास रणजी ट्रॉफी में सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी का रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका भी था. इस टूर्नामेंट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड महाराष्ट्र के बीबी निम्बालकर के नाम है. उन्होंने 1948-49 के सीजन में काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे.
सुतार इस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन 400 रनों के बाद उनकी पारी आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बावजूद उन्होंने पृथ्वी शॉ के 379 रनों को पीछे छोड़कर रणजी ट्रॉफी के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर दर्ज करा दिया. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में भी उनका नाम दर्ज हो गया.
आखिरी विकेट के लिए 190 रनों की नाबाद साझेदारी
सुतार की पारी में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ी. उन्होंने लालरेमपुनिया छकछुआक के साथ दसवें विकेट के लिए नाबाद 190 रन जोड़े. रणजी ट्रॉफी के इतिहास में आखिरी विकेट के लिए यह तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है.
दोनों बल्लेबाजों ने नगालैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट के लिए तरसाया. उनकी साझेदारी रणजी ट्रॉफी में आखिरी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी के रिकॉर्ड से 43 रन कम रही. यह रिकॉर्ड दिल्ली के अजय शर्मा और मनिंदर सिंह के नाम है, जिन्होंने 1991-92 के सीजन में मुंबई के खिलाफ 233 रन जोड़े थे.
मुंबई छोड़ मिजोरम पहुंचे, अब रचा इतिहास
चिन्मय सुतार का यह प्रदर्शन उनके करियर के लिए बेहद अहम है. वह इस साल विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई की ओर से खेल चुके हैं. स्थानीय क्रिकेट में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद उन्हें मुंबई की टीम में जगह मिली थी. जून में उन्होंने मुंबई टी20 लीग में एमएससी मराठा रॉयल्स को खिताब बचाने में मदद की. टूर्नामेंट में उन्होंने लगातार दो अर्धशतक लगाए और छह पारियों में 212 रन बनाए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट करीब 120 रहा.
2026-27 सीजन से पहले सुतार ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) हासिल किया और मिजोरम की टीम से जुड़ गए. उन्होंने पिछले सप्ताह मणिपुर के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया था. उस मुकाबले में उन्होंने पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 99 रन बनाए. हालांकि, मिजोरम को तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा.
पहली पारी में 68 रन की बढ़त गंवाने के बावजूद मिजोरम ने मुकाबले में वापसी की कोशिश की थी और सुतार की दूसरी पारी की बल्लेबाजी इसमें अहम रही. अब अपने दूसरे ही फर्स्ट क्लास मैच में 400 रनों का आंकड़ा पार करके उन्होंने अपनी प्रतिभा का शानदार नमूना पेश किया है.
चिन्मय सुतार की यह पारी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि धैर्य, एकाग्रता और लंबी बल्लेबाजी की कला का शानदार उदाहरण है. टी20 के दौर में 400 रनों की ऐसी पारी बताती है कि क्रिकेट में तेजी के साथ-साथ क्रीज पर टिककर खेलने की अहमियत आज भी बरकरार है.



