नासा का 1100 किलो का टेलीस्कोप धरती की ओर बढ़ा, क्या दुनिया पर मंडरा रहा खतरा?

वाशिंगटन

नासा का 22 साल पुराना ऐतिहासिक नील गेह्रेल्स स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप अपनी अंतिम यात्रा पर निकल चुका है. अंतरिक्ष में दो दशक से ज्यादा समय तक सेवा देने के बाद अब यह उपग्रह धरती पर गिरने वाला है. अमेरिकी स्पेस फोर्स के ताजा आकलन के अनुसार यह विशाल टेलीस्कोप बुधवार, 4 नवंबर को पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होगा. भारतीय समयानुसार बुधवार देर रात या गुरुवार तड़के इसके वायुमंडल की घनी परतों से टकराने की संभावना है. करीब 2,500 पाउंड यानी 1130 किलोग्राम से अधिक वजनी यह स्पेस ऑब्जर्वेटरी तेज घर्षण के कारण आसमान में ही जलकर भस्म हो जाएगी। 

पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री जॉन नौसेक ने बताया, ‘कम ऊंचाई वाली कक्षा में घूमने वाली हर चीज को एक दिन नीचे गिरना ही होता है और उसका अंत विनाशकारी होता है.’ वैज्ञानिक पहले से जानते थे कि इस मिशन का अंतिम सफर इसी तरह आग के गोले में बदल कर खत्म होगा। 

2 साल के मिशन ने अंतरिक्ष में 22 साल तक क्या करिश्मे दिखाए?
नासा ने स्विफ्ट टेलीस्कोप को साल 2004 में अंतरिक्ष में रवाना किया था. उस समय वैज्ञानिकों ने इसे केवल दो साल काम करने के हिसाब से डिजाइन किया था. इसके बावजूद इस जांबाज टेलीस्कोप ने लगभग 22 सालों तक लगातार काम करके विज्ञान जगत को चकित कर दिया. स्विफ्ट ने ब्रह्मांड के सबसे प्रचंड धमाकों यानी गामा-रे बर्स्ट का गहराई से अध्ययन किया। 

अपने पूरे सेवाकाल में इसने 2,000 से अधिक गामा-रे बर्स्ट और 1,400 से ज्यादा सुपरनोवा की घटनाओं को रिकॉर्ड किया. जब कोई विशाल ब्लैक होल किसी तारे को खींचकर निगल जाता है, उस दुर्लभ घटना को भी स्विफ्ट ने सफलतापूर्वक दर्ज किया था. हाल ही में सौरमंडल से गुजरे तीसरे इंटरस्टेलर ऑब्जेक्ट ‘धूमकेतु 3आई/एटलस’ के अध्ययन में भी इस टेलीस्कोप ने बड़ी भूमिका निभाई थी। 

नासा का यह अंतरिक्ष योद्धा धरती पर क्यों और कैसे गिर रहा है?
नासा के एस्ट्रोफिजिक्स डिवीजन के डायरेक्टर शॉन डोमागल-गोल्डमैन के अनुसार स्विफ्ट के जुटाए डेटा पर 7,000 से अधिक साइंटिफिक रिसर्च पेपर छप चुके हैं. इसका औसत हर हफ्ते करीब छह नए रिसर्च पेपर का बैठता है. वैज्ञानिक इस मिशन की उम्र को और आगे बढ़ाना चाहते थे. इसी साल जुलाई में नासा ने एक प्राइवेट स्पेस कंपनी के साथ मिलकर इसे बचाने की योजना बनाई थी। 

इसके तहत एक खास रोबोटिक सैटेलाइट भेजकर स्विफ्ट को ऊंची कक्षा में धकेलने की तैयारी थी. हालांकि वह रोबोटिक उपकरण रास्ते में ही खराब हो गया. इस विफलता के बाद वैज्ञानिकों को बचाव का विचार छोड़ना पड़ा. इसके बाद स्विफ्ट को धरती के गुरुत्वाकर्षण के हवाले कर दिया गया. अब यह टेलीस्कोप आकाश में एक चमकदार लकीर बनाते हुए हमेशा के लिए इतिहास में समा जाएगा। 

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